माँ कि सालगिरह

सुबह बात हुई
सालगिरह की बधाई दी
खूब साथ हसे
दूर होते हुए भी
नजदीक होने का एहसास हुआ
आप का ही अंश हूं
ये एहसास हुआ
मेरे होने से पहले
मैं आपमे मौजूद था
ये भी एहसास हुआ
जब में हंसता हूं
मां के होंट भी
मुस्कराते होंगे
जब में दुखी होता हूं
तो वो आंखें भी
भीग जाती होंगी
दूरियों का क्या है
एहसास से तो
हम पास पास हैं
तो आज चलो
अपनी सालगिरह साथ मनाएं
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Sun will rise

The orange stain

The sun
hides in vain
Unaware
of its orange stain

Into darkness
it stoops low
Alas betrayed
by the loony glow

Its just
an intervening night
for the illuminate
It is to shine bright

Reluctance and doubts
the light dispels
the mirror introduces
the light to itself

The rise is seen
Shining on the morning dew
Vibrant red
in the morning new

Aware
Realised
Resplendent
shining bright
within and outside

हर लम्हा बेमिसाल

चकाचौंध सी दुनिया
नजारे हजार हैं
जो मिल गया
उसके खोने का डर है
जो नहीं मिला
उसका मलाल है
बेकरार से रहे
दोष किस्मत को दिया
सोचा शायद
वक्त ही खराब है
पर जब देखा मैने
आंखें बंध कर
हर लम्हा बेमिसाल है

चिट्टी आयी है

कुछ लिखा होगा
फिर मिटा के
कुछ इज़हार किया होगा
कुछ छुपा के
वो असमंजस, वो हिचक
जो कलम की रुकावट में छुप गई थी
उसका भी एहसास
लाई है ये चिट्टी
शब्द ही नहीं
खुशबु और जज़्बात
भी लाई है ये चिट्टी