Shayad

कुछ लिख देता हूं
यूं ही
अपने सच्चे झूठे अल्फ़ाज़
बस यूं ही

तुम्हें पसंद आया
तो लगा
शायद
अच्छा होगा

तुमने माना
तो लगा
शायद
सच्चा होगा

किसको फर्क
किसको परवाह
क्या सच
और किसका सच

पर ये तो सच है
की एक एहसास
जो मेरा था
अब हमारा है

इसी सच पर
यकीन है
इसी भरोसे पर
ये नई मोहिम है

कुछ और लिख रहा हूं
ये सोच कर
तुम्हे पसंद आएगा
बस यूं ही शायद

Phir ek baar

फिर वही दिन
जीना चाहता हूं
फिर वही राहों से
गुजरना चाहता हूं

हर उस पल को
महसूस करना चाहता हूं
जैसा था, जैसा हुआ
बस वैसा ही रखना चाहता हूं

हर खुशी
और गम के लम्हों को
फिर एक बार
चखना चाहता हूं

कुछ छोटे
कुछ लंबे
कदमों के निशान पर
फिर चलना चाहता हूं

कुछ बदलने की ख्वाइश नहीं
कोई शिकवा कोई शिकायत नहीं
बस एक बार और
जीना चाहता हूं

मुखौटे

ऐसा कुछ है
जो भूल गया
शायद कोई बात है
जो कहते कहते रह गया।

थोड़ी हिचक
थोड़ी शर्म
रोक टोक
और अनदेखा भ्रम।

ज़िन्दगी की सीख से चुनी
रसमों की दीवारों में
सही और गलत रंग की
सियाही से लिखे
दकियानूसी रिवाजों ने

एक एक कर
दफनाया है
कई सहमें से ख्वाबों को।

ऐसे ही दिन गुज़र गए
दुनिया से बेज़ार
रह गए तो बस
मुखौटे हज़ार।

नए चेहरे लगा कर
आज फिर मुस्कुराया हूं
अब इसी चहरे से वाकिफ हूं
अपनी असल भूल आया हूं

वक्त है, गुज़र जाएगा

लो आगया छुट्टी का दिन
लगता दूर था महीने पहले
जैसे कभी नहीं मिलेंगे
इस दिन से, कई दिनों तक
कई अरमान बुने थे
ये करेंगे
उनसे मिलेंगे
देर तक बातें करेंगे
पर ये समय है कि मानता नहीं
रेंगता, कभी भागता
बस चलता रहता है
कुछ पल लगा
थोडा और जी लें
कुछ पल को, थोड़ा रोक लें
ऐसी उम्मीद, उम्मीद ही रह गई
कुछ अरमान पूरे हुए
कुछ रह गए
समय चलता रहा
वक्त गुज़र गया
अब नई तारिक़ का आसरा है
चर्चा उन दिनों का है
फिर मौका आयेगा
वो दिन आज दूर है
पर जल्द ही आएगा
क्योंकि वक्त है
गुज़र जाएगा

Aaj Vela hoon

आज अकेला हुं
सुबह से वेला हूं
दुनिया को बचाने
अपने घर पे सोयेला हूं

भ्रमण कर आज
घर वापस आया हूं
कश्मीर से कन्याकुमारी का सफर
वास्तव में कर आया हूं

इंसान को ६ फीट दूर से देखा तो
थोड़ा डरा हुआ पाया है
हर आंखों में शक और कौफ का साया
भरपूर नजर आया है

इस नासूर वायरस
का वास्ता है
डर जातें हैं सब
जब कोई खांसता है

इन काले बादलों में मैंने
छिपे सिल्वर लाइनिंग को भी देखा है
भागते लम्हों को आज
चलते हुए देखा है

schedule wali डेयरी को दिया धोका
और टाइम को दिया रोका
मिला है थोड़ा सोचने का मौका
और कुछ नज़रिए का नया झरोखा

आज अकेला हुं
सुबह से वेला हूं
दुनिया को बचाने के चक्कर में
अपने आप से आज मिलेला हूं

दीवार पे तस्वीर

दीवारों पे टंगी तस्वीर ने
बेजुबान कई कहानियां
अतीत की आवाज़ चुरा कर
आज मुझे सुनाया है

कैद कर वो लम्हा
तस्वीरों के बेजान पन्नों पर
फिर आज जैसे
वही एहसास लौट आया है

नज़र धुंधला गई है
आंखे नम हो गई है
तस्वीर वहीं दीवार पे थम गई है
पर अरमानों ने उड़ान भर ली है

समय की सूइयों को
मोड़ने का ख्याल आया है
उस लम्हे को फिर से
जीने का ख्वाब सजाया है

समय की रेत को टटोला
तो वो लम्हा हाथ आया है
उसी लम्हें में पूरी उम्र
गुजारने का ख्याल आया है

वहां हमेशा तक

यूहीं साथ चले
कुछ देर तक
कुछ दूर तक

यूहीं साथ चले
कदमों के निशान
समय की रेत पर

ऐसा लगा
कल की बात है
साल २२ बीत गए

बातों बातों में
वक़्त का पता ना चला
कई कहानियां कह गए

कुछ मीठे
कुछ तीखे
कई पकवान सज गए

जिस्म अलहदा सही
अपने काम में मशरूफ कभी
एहसास गहरे रह गए

कदम साथ यूं चले
एक हस्ती रह गई
बाकी निशान मिट गए

यूंही चल पड़े
साथ साथ
कुछ दूर तक
वहां हमेशा तकl

एक और एज़फा सिफर हो गया

डायरी में काम लिख कर
पूरा दिन भर दिया
लो एक दिन और गुजर गया
एक और इज़ाफ़ा
सिफर हो गया

ये लिस्ट लंबी है
अभी काम बाकी है
वक्त का हर लम्हा भर सा गया है
एक और दिन इसी होड में
बिसर हो गया

रस्ता लंबा है
पेड़ों का साया पीछे रह गया
रुकने का वक्त मुकर्रर नहीं किया
हर नज़ारा मायूस है
कि नज़र अंदाज़ हो गया

सुबह हुई
रात का इंतजार हुआ
दिन गिनते हुए साल तमाम हुआ
उम्र बीत गईं
सुकून ए महफ़िल का इंतज़ार रहा

कौनसी मंज़िल मेरी है
कहां मुझे जाना है
कल इस पर गौर किया जाएगा
आज का दिन सारा
फिक्र में गुज़र गया