Unbridled Laughter बेफ़िक्र बिंदास हँसी

होंठों से आँखो तक पहुँचती
फिर आयी वो हँसी
बेफ़िक्र बिन्दास
वही ठहाकों वाली हँसी

दोस्तों की बातों में
पुराने लम्हे फ़िर ताज़ा हुए
कुछ क़िस्से जो याद थे
कुछ चुपचाप भुलाए हुए

हंसते हंसते शायद
ग़ुस्ताख़ आँखें भर आयी
कुछ देर जैसे अनबुलायी
चुप्पी सी छागयी

अपने ख़यालों में चुपचाप
सबने अपनी ज़िंदगी फिर जी ली
खामोशी ने सबकी कहानी
चीक चीक के सुना दी

स्क्रीन से आँख हठी तो
बंद खिड़कियों का अहसास फिर लौट आया है
मेरे ख़ाली कमरे की ख़ामोशी में
हँसी की ठहाकों ने हुड़दंग मचाया है

शर्मिंदा खामोशी से
उस लतीफ़ा ने बचाया है
दूर बैठे दोस्तों को
अपने कम्प्यूटर की स्क्रीन पे पाया है

आज खुल के बेफ़िक्र
फिर से हंस लिया है
उन ख़ुशी के लमहों को
एक बार फ़िर जी भर के जी लिया है

वहां हमेशा तक

यूहीं साथ चले
कुछ देर तक
कुछ दूर तक

यूहीं साथ चले
कदमों के निशान
समय की रेत पर

ऐसा लगा
कल की बात है
साल २२ बीत गए

बातों बातों में
वक़्त का पता ना चला
कई कहानियां कह गए

कुछ मीठे
कुछ तीखे
कई पकवान सज गए

जिस्म अलहदा सही
अपने काम में मशरूफ कभी
एहसास गहरे रह गए

कदम साथ यूं चले
एक हस्ती रह गई
बाकी निशान मिट गए

यूंही चल पड़े
साथ साथ
कुछ दूर तक
वहां हमेशा तकl

जिंदगी की कहानी

मिला उन सबसे
मेरी यादें हैं जो
हर लम्हों कि महक महसूस कर ली
ऐसा लगा जिंदगी फिर जी ली

हंसी के पल
ठहाके लगा कर जी लिए
फिर खुराफात के मौके ढूँढ लिए
फिर बचपन कि बेचैन दस्तक सुन ली

गले लगा के धड़कनों को पहचान लिया
उनकी खुशबु का असर देर तक महसूस किया
कभी दूर ना थे, ये एहसास हुआ
ऐसा लगा कि फिर उसी पल की नजाकत देख ली

हर शख्स जो मिला
जिंदगी का हिस्सा बन गया
वो मेरी और मैं उनकी कहानी बन गया
उनसे मुलाकात कर ऐसा लगा
फिर यादों में अपनी जिंदगी की कहानी सुन ली

आज फिर से

आज क्यूँ ऐसा लगा
तुमसे दोस्ती कर लें….
…. जान पहचान हुए
अर्सा हो गया

यह चेहरा
कुछ अपना सा लगा…
… आँखों में आंखें डाले
अर्सा हो गया

हाथ थामा है अब
तो गर्माहट का अह्सास हुआ…
… ठंड में नर्म धूप का लुफ्त लिए
अर्सा हो गया

आज जब बैठे
तो सदियों के किस्से याद आये…
… फुर्सत कि दोपहर चुरा कर सोए
अर्सा हो गया

तुमसे आज फिर मुलाकात हुई
अछा सा लगा…
… नए दोस्त बनाए
अर्सा हो गया

आज क्यूँ ऐसा लगा
तुमसे दोस्ती कर लें…
… रिश्ता हमारा हुए
अर्सा हो गया