Let’s shuffle the cards

Cards are shuffled

One card is picked

One specific suit

Of a particular colour is chosen

The identity is decided

And that decides the game

All actions bound by the rules

the wins and the losses

based on the set hierarchy

each dealt hand

judged

They turn into a pile of cards eventually

of winners and losers

ready for another shuffle

My own ink

Life passes in a blink

Living it always on the brink

Take a pause and think

script life with your own ink

This poem in 22 words is in response and inspired by the prompt word ‘ink’ https://sammiscribbles.wordpress.com/2021/06/26/weekend-writing-prompt-215-ink/

Do read other wonderful expressions of ‘Ink’ wrapped in 22 words. Do share your comments.

Share your views on how you are living your life. Is the ink on your life script is yours??

Unbridled Laughter बेफ़िक्र बिंदास हँसी

होंठों से आँखो तक पहुँचती
फिर आयी वो हँसी
बेफ़िक्र बिन्दास
वही ठहाकों वाली हँसी

दोस्तों की बातों में
पुराने लम्हे फ़िर ताज़ा हुए
कुछ क़िस्से जो याद थे
कुछ चुपचाप भुलाए हुए

हंसते हंसते शायद
ग़ुस्ताख़ आँखें भर आयी
कुछ देर जैसे अनबुलायी
चुप्पी सी छागयी

अपने ख़यालों में चुपचाप
सबने अपनी ज़िंदगी फिर जी ली
खामोशी ने सबकी कहानी
चीक चीक के सुना दी

स्क्रीन से आँख हठी तो
बंद खिड़कियों का अहसास फिर लौट आया है
मेरे ख़ाली कमरे की ख़ामोशी में
हँसी की ठहाकों ने हुड़दंग मचाया है

शर्मिंदा खामोशी से
उस लतीफ़ा ने बचाया है
दूर बैठे दोस्तों को
अपने कम्प्यूटर की स्क्रीन पे पाया है

आज खुल के बेफ़िक्र
फिर से हंस लिया है
उन ख़ुशी के लमहों को
एक बार फ़िर जी भर के जी लिया है

Phir ek baar

फिर वही दिन
जीना चाहता हूं
फिर वही राहों से
गुजरना चाहता हूं

हर उस पल को
महसूस करना चाहता हूं
जैसा था, जैसा हुआ
बस वैसा ही रखना चाहता हूं

हर खुशी
और गम के लम्हों को
फिर एक बार
चखना चाहता हूं

कुछ छोटे
कुछ लंबे
कदमों के निशान पर
फिर चलना चाहता हूं

कुछ बदलने की ख्वाइश नहीं
कोई शिकवा कोई शिकायत नहीं
बस एक बार और
जीना चाहता हूं