Phir ek baar

फिर वही दिन
जीना चाहता हूं
फिर वही राहों से
गुजरना चाहता हूं

हर उस पल को
महसूस करना चाहता हूं
जैसा था, जैसा हुआ
बस वैसा ही रखना चाहता हूं

हर खुशी
और गम के लम्हों को
फिर एक बार
चखना चाहता हूं

कुछ छोटे
कुछ लंबे
कदमों के निशान पर
फिर चलना चाहता हूं

कुछ बदलने की ख्वाइश नहीं
कोई शिकवा कोई शिकायत नहीं
बस एक बार और
जीना चाहता हूं

I am the dusk

I am the dusk
then it will be dark
fiery ball cools
weary of the scorching day
sliding down rapidly
pulling the rays down
pausing briefly at the rim
Just for one last look
at its creation
before it is night
last stroke of golden brush
paints the sky crimson
I am the dusk
slowly turning dark
last rays lingers on my wings
warming it, to be alive
it no time to be trapped
its my final flight
I reach out to the glowing light
and I soar
its a new day

कोई आज मुस्कुराया है

कुछ खोया नहीं
सब पाया है
जो बांट दिया
वो कहां गवाया है

इनसे मिला हूं
उनको पहचानता नहीं
सब अपने है
कौन पराया है

ये शोहरत का क्या
आज है कल नहीं
दुआओं को हमेशा
अपने साथ पाया है

कोई याद रखे
ऐसी ख्वाहिश तो नहीं
लम्हे खुशी के याद करके
कोई तो मुकुराया है