वक्त है, गुज़र जाएगा

लो आगया छुट्टी का दिन
लगता दूर था महीने पहले
जैसे कभी नहीं मिलेंगे
इस दिन से, कई दिनों तक
कई अरमान बुने थे
ये करेंगे
उनसे मिलेंगे
देर तक बातें करेंगे
पर ये समय है कि मानता नहीं
रेंगता, कभी भागता
बस चलता रहता है
कुछ पल लगा
थोडा और जी लें
कुछ पल को, थोड़ा रोक लें
ऐसी उम्मीद, उम्मीद ही रह गई
कुछ अरमान पूरे हुए
कुछ रह गए
समय चलता रहा
वक्त गुज़र गया
अब नई तारिक़ का आसरा है
चर्चा उन दिनों का है
फिर मौका आयेगा
वो दिन आज दूर है
पर जल्द ही आएगा
क्योंकि वक्त है
गुज़र जाएगा

दीवार पे तस्वीर

दीवारों पे टंगी तस्वीर ने
बेजुबान कई कहानियां
अतीत की आवाज़ चुरा कर
आज मुझे सुनाया है

कैद कर वो लम्हा
तस्वीरों के बेजान पन्नों पर
फिर आज जैसे
वही एहसास लौट आया है

नज़र धुंधला गई है
आंखे नम हो गई है
तस्वीर वहीं दीवार पे थम गई है
पर अरमानों ने उड़ान भर ली है

समय की सूइयों को
मोड़ने का ख्याल आया है
उस लम्हे को फिर से
जीने का ख्वाब सजाया है

समय की रेत को टटोला
तो वो लम्हा हाथ आया है
उसी लम्हें में पूरी उम्र
गुजारने का ख्याल आया है