सोई धूप

Picture credit – Anjali my daughter

वो आई धूप
बंद खिड़कियों के शीशों से
कमरे कि देहलीज़ लांघ कर
वो लाई धूप
उस दूर जलती आग कि आंच
हथेली में बचा कर
किरनों की गुस्ताख हाथों ने
चुपके से मला
वो आलसी गर्माहट मेरे गालों पर
दूर से आई आंच
मेरे पल का हिस्सा बन गई
कुछ कहा नहीं
पर कुछ एहसास सा दे गई
कुछ कहते कहते
यूँ आंख सी लग गई
कुछ देर मेरे साथ
वो धूप भी सो गई

नयी सुबह

कुछ खो सा गया है
ऐसा एहसास है।
क्या कोई चमन था
जो खो गया है?

खून की बारिश
कुछ थम सी गई है,
खुला आसमान
कुछ नया सा लगता है।

खौफ का आलम
कुछ ऐसा था कि,
इस खामोश अमन
की आदत नहीं थी।

हालात बदलेंगे
शक इस बात का हर वक़्त रहा,
अपनी खुश नसीबी का
अर्से से एतबार नहीं है।

इतना झूट से रिश्ता
गहरा हो गया है,
सच्चाई पे अब
विश्वास ही नहीं है।

शायद,
मौसम बदल रहा है,
नया आलम आने को है,
कुछ खोने का एहसास है तो सही,
पर शायद पाने का डर भी भरा है।

आओ आंखें मलें,
और अपने नसीब को सवार लें।
खौफ और शक की रात गई
नयी सुबह होने को है।

माँ कि सालगिरह

सुबह बात हुई
सालगिरह की बधाई दी
खूब साथ हसे
दूर होते हुए भी
नजदीक होने का एहसास हुआ
आप का ही अंश हूं
ये एहसास हुआ
मेरे होने से पहले
मैं आपमे मौजूद था
ये भी एहसास हुआ
जब में हंसता हूं
मां के होंट भी
मुस्कराते होंगे
जब में दुखी होता हूं
तो वो आंखें भी
भीग जाती होंगी
दूरियों का क्या है
एहसास से तो
हम पास पास हैं
तो आज चलो
अपनी सालगिरह साथ मनाएं
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Sun will rise

The orange stain

The sun
hides in vain
Unaware
of its orange stain

Into darkness
it stoops low
Alas betrayed
by the loony glow

Its just
an intervening night
for the illuminate
It is to shine bright

Reluctance and doubts
the light dispels
the mirror introduces
the light to itself

The rise is seen
Shining on the morning dew
Vibrant red
in the morning new

Aware
Realised
Resplendent
shining bright
within and outside

हर लम्हा बेमिसाल

चकाचौंध सी दुनिया
नजारे हजार हैं
जो मिल गया
उसके खोने का डर है
जो नहीं मिला
उसका मलाल है
बेकरार से रहे
दोष किस्मत को दिया
सोचा शायद
वक्त ही खराब है
पर जब देखा मैने
आंखें बंध कर
हर लम्हा बेमिसाल है

चिट्टी आयी है

कुछ लिखा होगा
फिर मिटा के
कुछ इज़हार किया होगा
कुछ छुपा के
वो असमंजस, वो हिचक
जो कलम की रुकावट में छुप गई थी
उसका भी एहसास
लाई है ये चिट्टी
शब्द ही नहीं
खुशबु और जज़्बात
भी लाई है ये चिट्टी

जिंदगी की कहानी

मिला उन सबसे
मेरी यादें हैं जो
हर लम्हों कि महक महसूस कर ली
ऐसा लगा जिंदगी फिर जी ली

हंसी के पल
ठहाके लगा कर जी लिए
फिर खुराफात के मौके ढूँढ लिए
फिर बचपन कि बेचैन दस्तक सुन ली

गले लगा के धड़कनों को पहचान लिया
उनकी खुशबु का असर देर तक महसूस किया
कभी दूर ना थे, ये एहसास हुआ
ऐसा लगा कि फिर उसी पल की नजाकत देख ली

हर शख्स जो मिला
जिंदगी का हिस्सा बन गया
वो मेरी और मैं उनकी कहानी बन गया
उनसे मुलाकात कर ऐसा लगा
फिर यादों में अपनी जिंदगी की कहानी सुन ली

Underneath the starry sky

Underneath the starry sky
Its lonely
They are so many
and its only me

Do they see
The twinkle in my eye?
Or can they see
the cleverly concealed lie?

Merrily they stand and watch
Transfixed in their velvety black dome
Unable themselves, yet mocking
Hoping I wouldn’t save my self on my own

Dawn is breaking
Its the end of thier time
Its a new day
And they know its mine